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मैं चाहता हूँ ख़ुद को पढ़ना तुम्हारे शब्दों में, सुनो , तुम लिखते क्यूँ नहीं मुझे पन्नों पर.. #आशु Read more
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‘ईश्वर’ और ‘प्रेम’ परिभाषाओं से परे होते है..इन्हें शब्दों में अंकित करने के सबों के सभी प्रयत्न विफल ही होते है! ‘ईश्वर’ और ‘प्रेम’ सर्वत्र है। Read more
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“प्रेम में होना”…यह मन व आत्मा की वो अवस्था है..जिस’में आप चाहकर भी कुछ बुरा नही कर सकते..आपका ईश्वर आपको बुरा करने ही नही देता..! यूं तो ईश्वर की आराधना करते है सभी, समझता कौन है इसे..? #ValentineSpecial Read more
