आशुपुराण

ख़्यालों पर अब बंदिशें लगने लगी हैं।

  • एकमा गांव की ठंडी जाड़ें की शामें कुछ और ही हुआ करती थीं। जब आसमान में हल्की धुंध की चादर फैल जाती, सूरज ढलने पर घर के आंगन और दुआर पर गूंजती हंसी-ठिठोली का माहौल बनता। गांव के हर घर के दुआर पर ठंड की ठिठुरन में पुआल और लकड़ी जलाकर “घूर” जलाया जाता था।… Read more

  • बात तुम्हारी

    कहते सुनते बात तुम्हारी सो जाता हूँ..ऐसे ही मैं रोज़ तुम्हारा हो जाता हूं। ❤️💛 Read more

  • तलब़

    मैं नहीं चाहता कि वो मेरे बुलाने से आए,मैं चाहता हूं कि वो रह ना पाए और बहाने से आए… 💛 Read more

  • मौन

    ये जो बीच मौन पसारा है,इस मौन को वाणी मत देना।तुम कहते हो सब सुनते हैं,कहो निजता कहां ही खोजूं मैं?शब्द तुम्हारे हो ना सके,मौन मेरा है, रह जाने देना!इस मौन को वाणी मत देना। Read more

  • नींद

    मेरे सफ़ेद से स्वप्नों मेंतुम हो या नहीं.. अनभिज्ञ हूं..पर पलकों तले तुम्हारी याद है,जो मध्य आकर नींद को बाधित करती है। किसी नीली सी रात, तुम होगे समीपआएगी नींद और गुलाबी स्वप्न। आशु 😎 सितम्बर 18, 2020 Read more

  • 18 सितम्बर 2020

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  • तुम मेरी कविता में शांति ढूँढते हो,गलत करते हो..अपनी व्याकुलता रखी है मैनें। तुम मेरी कविता में प्रकाश ढूँढते हो,गलत करते हो..अपना अँधेरा रखा है मैनें। तुम मेरी कविता में संसार ढूँढते हो,गलत करते हो..अपना शून्य रखा है मैनें। तुम मेरी कविता में प्रेम ढूँढते हो,गलत करते हो..अपना विरह रखा है मैनें। तुम मेरी कविता… Read more

  • अगस्त २१, २०२०

    मैं अपनी बातों में खोया था और तुम अपनी समस्त चेतना समेत मेरी आँखों में…मेरे झंकझोरने पर..”तुम्हारी आँखें” एक कहानी कह रही थी.. उस रात कई सालों बाद आसमां पर चाँद मुस्कुराता दिखा था, ठीक वैसा ही जैसा एकबार बचपन में माँ से चाँद वाली कविता सुनने के बाद दिखा था! तुम्हें सुन कर खिल… Read more

  • A letter to my Queen..

    Dear Queen, विविधता की दुनियां है और भांति भांति के लोग, अजीब दौड़ में हूं इस रात.. एक फैसला जो दो परिवारों, दो जिंदगी का होता है। मैं इस रात को जिए हुए पल को बंया भी क्या करू.. लगता है जैसे रात आसमां पर टहलते हुए चाँद के करीब पहुँच गया,  गुजरते हुए जेब… Read more

  • 🧡

    कितना सहज होता है,मेरे मन मे प्रेम का उग आना..जैसे उग आती है दूब, बारिश में…जैसे अनायास आते हो तुम मेरे ख्वाबों में,जैसे बढ़ जाता है मन की व्याग्रता,तुम्हारे सुनहरे बदन को छुने की..रहस्यमयी लगता है..अगर छू पाऊं,तुम्हारे मन की देहरी कभी…. ~आशु१६ जुलाई २०२० Read more

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