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एकमा गांव की ठंडी जाड़ें की शामें कुछ और ही हुआ करती थीं। जब आसमान में हल्की धुंध की चादर फैल जाती, सूरज ढलने पर घर के आंगन और दुआर पर गूंजती हंसी-ठिठोली का माहौल बनता। गांव के हर घर के दुआर पर ठंड की ठिठुरन में पुआल और लकड़ी जलाकर “घूर” जलाया जाता था।… Read more
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कहते सुनते बात तुम्हारी सो जाता हूँ..ऐसे ही मैं रोज़ तुम्हारा हो जाता हूं। ❤️💛 Read more
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तुम मेरी कविता में शांति ढूँढते हो,गलत करते हो..अपनी व्याकुलता रखी है मैनें। तुम मेरी कविता में प्रकाश ढूँढते हो,गलत करते हो..अपना अँधेरा रखा है मैनें। तुम मेरी कविता में संसार ढूँढते हो,गलत करते हो..अपना शून्य रखा है मैनें। तुम मेरी कविता में प्रेम ढूँढते हो,गलत करते हो..अपना विरह रखा है मैनें। तुम मेरी कविता… Read more
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मैं अपनी बातों में खोया था और तुम अपनी समस्त चेतना समेत मेरी आँखों में…मेरे झंकझोरने पर..”तुम्हारी आँखें” एक कहानी कह रही थी.. उस रात कई सालों बाद आसमां पर चाँद मुस्कुराता दिखा था, ठीक वैसा ही जैसा एकबार बचपन में माँ से चाँद वाली कविता सुनने के बाद दिखा था! तुम्हें सुन कर खिल… Read more
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Dear Queen, विविधता की दुनियां है और भांति भांति के लोग, अजीब दौड़ में हूं इस रात.. एक फैसला जो दो परिवारों, दो जिंदगी का होता है। मैं इस रात को जिए हुए पल को बंया भी क्या करू.. लगता है जैसे रात आसमां पर टहलते हुए चाँद के करीब पहुँच गया, गुजरते हुए जेब… Read more
