आशुपुराण

ख़्यालों पर अब बंदिशें लगने लगी हैं।

  • अर्ध प्रेम..

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    सोचा था हज़ारों लफ़्ज लिखूंगा,तुम्हें सामने बिठाकर..नज़र तुम्हारे तिल पे क्या ठहरी,कागज़ कोरे रह गए.. ❣️ Read more

  • शहज़ादी..

    तुम सौम्य शहज़ादी…तुम्हारे भीतर गहरे में क्या हैं..?जंगल या मरुस्थल…? क्यूं भटक जाता हूं, क्यूं खो जाता हूं..? या है भीतर गहरे में वो राज तुम्हारे..शीतल मन और सुनहरा देह तुम्हारा.. उतर जाने दो भीतर गहरे में,समंदर सी आंखों के रास्ते..करने दो सुलह..तेरे हृदय का स्पंदन, मेरे रक्त के संचार को.. ~आशु Read more

  • मनाकांक्षा

    हम सबकी मनाकांक्षा होती है, जिसे हम कई बार औरों की वजह से उसे अपने अंदर कैद रहने देते हैं। एक ख़त लिखना चाहता हूं तुम्हारे नाम …. कभी कभी खुद को खुद के सामने बिठा कुछ सवाल कुछ जवाब लेने का मन होता है तो कभी जिंदगी को ठेंगा दिखा खिलखिलाकर भाग जाने का… Read more

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    जानती हो.. तुम्हारे बदन पर बिखरे हुए तिल कुछ यूं लगते हैं..जैसे तुम्हें लिखने वाला वहाँ कलम की नोक रखकर,कल्पना में डूब गया हो…❣️ Read more

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    मैं कितना भी हंस लूं..मन की खोह मे..तुम्हारे ना होने का दुःख..हमेशा एक डीबिया की तरह जलता है। Read more

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    काली रातों का गाढ़ापन..तुम्हारी काजल भरी आँखों की तरह होना चाहिए….तुम्हारी मुस्कुराहट की तरह होनीं चाहिए..शीतल चाँदनी रातें..। Read more

  • तुम्हारा प्रेम और मेरी प्रतीक्षा..दोनों अनंत हैं.. Read more

  • खामोशी

    खामोशी समझते नहीं तुम..मेरी लफ्ज़ों से क्या सुन पाओगे,सुननी थी बात तुम्हें..आकर तो यूं ही चले जाओगे..मौन के भीतर शब्द है..आॅंखों में कब उतर पाओगे,पुकारता हूं तुम्हे हजार बार,समझकर भी तुम, समझ ना पाओगे। ~आशु Read more

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