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मैं सुनता हूं,,तुम्हारी आवाज सुनता हूं..वह जो शब्द नहीं व्यथा है तुम्हारी,वह जो भंग करती हैमेरे भीतर का महाशून्य..मैं पंख बन जाना चाहता हूं तुम्हारी चेतना का, तुम्हारी व्यथा का..और बिखेर देना चाहता हूं पंख को,तुम्हारे समीप..पंखों से ओढ लूं आवरण तुम्हारा..और कर दूं शीतल वायुमंडल समीप तुम्हारेमैं सुनता हूं..वो सब जो अंदर और बाहर… Read more
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अकेले पड़ चुके लड़केअपने लिए चुनते हैरात, अँधेरा, छत, शराब और धुआं,हो जाते है इतने लापरवाहकि घर के साथउनका मन भी सन जाता है धूल से,मर जाती है उनकी भूखऔर साथ ही उनकी सभी संवेदनाएं.. अकेले पड़ चुके लड़केजीवित तो होते हैलेकिन उनमे किंचित भी जीवन शेष नहीं होता… Read more
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अकेली पड़ चुकी लड़कियाँअपने लिए चुनती हैमौन ,धर्म , पूजा ,प्रतिष्ठान व ईश्वरहो जाती है इतनी नीरसकि घर के साथउनका मन भी हो जाता है रिक्तमर जाती है उनकी आत्माऔर साथ ही भविष्य की सारी संभावनाएँ अकेली पड़ चुकी लड़कियाँसीख जाती है माफ करनाऔर उनमें किंचित भी भय शेष नही बचता.. #आशु Read more
