आशुपुराण

ख़्यालों पर अब बंदिशें लगने लगी हैं।

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    वह जो अदृश्य हाथ था तुम्हारा..जिसके सम्बल से चल रहा था मैं,ना पास हैं तुम्हारे तो क्या हुआ..लौटा दो जैसा साथ था तुम्हारा। ~आशु Read more

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    नाराज़गी होती तो संवार भी लेता,कमबख्त इश्क सा लिखा तुम पढ़ते नहीं कभी… 😡 Read more

  • मैं सुनता हूं,,तुम्हारी आवाज सुनता हूं..वह जो शब्द नहीं व्यथा है तुम्हारी,वह जो भंग करती हैमेरे भीतर का महाशून्य..मैं पंख बन जाना चाहता हूं तुम्हारी चेतना का, तुम्हारी व्यथा का..और बिखेर देना चाहता हूं पंख को,तुम्हारे समीप..पंखों से ओढ लूं आवरण तुम्हारा..और कर दूं शीतल वायुमंडल समीप तुम्हारेमैं सुनता हूं..वो सब जो अंदर और बाहर… Read more

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  • बारिश

    पसीने में नहाए बिना, आँखों से लहू बहाए बिना.. शब्दों में अर्थ नहीं मिलेंगे, जैसे भीगे बिना बारिश लिखोगे तो काग़ज़ सूखा रह जाएगा.. Read more

  • #Lockdown

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    तुम जो मेरी मुक्ति का द्वार हो..तुम मुझसे दूर, बहुत दूर,कि मैं तुम्हे छू भी नहीं पाता.. आशु…..✍️ Read more

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    मेरे भीतर स्थितसंवेदनाओं की सारी नदियांअपने बहाव से एकदम विपरीत बह रही है… Read more

  • अकेले पड़ चुके लड़केअपने लिए चुनते हैरात, अँधेरा, छत, शराब और धुआं,हो जाते है इतने लापरवाहकि घर के साथउनका मन भी सन जाता है धूल से,मर जाती है उनकी भूखऔर साथ ही उनकी सभी संवेदनाएं.. अकेले पड़ चुके लड़केजीवित तो होते हैलेकिन उनमे किंचित भी जीवन शेष नहीं होता… Read more

  • अकेली पड़ चुकी लड़कियाँअपने लिए चुनती हैमौन ,धर्म , पूजा ,प्रतिष्ठान व ईश्वरहो जाती है इतनी नीरसकि घर के साथउनका मन भी हो जाता है रिक्तमर जाती है उनकी आत्माऔर साथ ही भविष्य की सारी संभावनाएँ अकेली पड़ चुकी लड़कियाँसीख जाती है माफ करनाऔर उनमें किंचित भी भय शेष नही बचता.. #आशु Read more

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