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लम्बी और अर्थहीन यात्राओं में, जीने का मकसद ही क्या है? ऐसा तो नहीं है कि तुम्हारा होना ही मेरे होने की परिभाषा है.. पर जो है वो तुमसे अनसुना अनजाना नहीं रख सकता। कितनी बातें कहने की हैं जो होठों पर सहमा हुआ सा हैं, इक रोज़ इन्हें सुन लो, जान लो कि तुम्हारा… Read more
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अकेले पड़ चुके लड़केअपने लिए चुनते हैरात, अँधेरा, छत, शराब और धुआं,हो जाते है इतने लापरवाहकि घर के साथउनका मन भी सन जाता है धूल से,मर जाती है उनकी भूखऔर साथ ही उनकी सभी संवेदनाएं.. अकेले पड़ चुके लड़केजीवित तो होते हैलेकिन उनमे किंचित भी जीवन शेष नहीं होता… आशु 😬 Read more
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कुछ लोग इतने खास हो जाते हैं कि उनका मैं और तुम कहना भी हम लगने लगता है। ये हमारे खयाल ही होते हैं जो हमें भावनाओं से जोड़ते रहते हैं। खयालों में बंदिशें नहीं होनी चाहिए, पर अब वक्त कुछ और है जिसमें हमने खुद के अंदर झांकना ही बंद कर दिया। खैर, हम… Read more
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मन का मौसमी रंग बदल रहा है.. सफेद रंग जो जिंदगी के किसी कोने में रखे होते हैं, ये गर स्याह होती तो हर बार दिख जाता। सफेद और स्याह जैसे सुबह और शाम हो जाते हैं। सुबह तुम्हारी मुस्कुराहटें बिखरती है और शाम को मेरी नजरें.. चेहरे पर तैरते सुकून और तुम्हारी ख्वाहिशों की… Read more
