आशुपुराण

ख़्यालों पर अब बंदिशें लगने लगी हैं।

Uncategorized

  • दीपोत्सव २०१९

    एक दिया ऐसा भी हो, जो भीतर तलक प्रकाश करे.. सबकी नफरतों में इश्क से उजाला भर दे, एक दिया जो भेद मिटा दे, क्या तेरा, क्या मेरा, सब अपना ले। एक दिया जो याद दिलाए, हर रात के बाद सवेरा है। #शुभ दीपोत्सव। #आशु Read more

  • आकांक्षा

    मेरी क्या आकांक्षा है तुमसे… तुम्हारा मन जो निर्मल और जीवन से पूर्ण हैं, पानी के उस प्रथम स्त्रोत सा जो करोड़ों वर्ष पहले पृथ्वी पर हुआ करता था, उस जीवन्त और निर्मल मन का एक अंश दे दो मुझे कि मेरा मन भी हो जाए निर्मल और उतना ही परिष्कृत… #आशु Read more

  • सितंबर १८,२०१९

    आकांक्षा, जिंदगी को साझा करने का शुक्रिया! ऐसे चंद पल जो तुम्हारे साथ होते हैं, इस दम घोटूं हवा में आॅक्सीजन का काम करते हैं। यूं तो सफर अनोखा है हमारा.. कोई अधिकार नहीं, कोई प्रतिकार भी नहीं, जो मेरा है ही नहीं ,उससे शिकायतों का व्यवहार भी नहीं, जिंदगी से रिश्ते की ये शर्त… Read more

  • 😍

    इश्क़.. तेरे बिना भी मैं तुमसे किया जाता हूं। #आशु Read more

  • नीली कमीज़

    मन नीले जादू से सरोबार है…उसका कोट और कोट की जेब में सलीके से रखा रुमाल … बालों में भरी चांदी और हाथों में सम्हाल हुआ सोना , वो लाखों दुआओं से गढ़ा हुआ शख्स है … वो अपने कंधे पर हजारों की उम्मीदें लिए ऐसे मुस्कुरा रहा है जैसे कोई बच्चा मुट्ठी में चांद… Read more

  • आकांक्षा

    तुम पुनः आकर अपना हृदय मुझे देकर चली जाना, वो हृदय जिसमें प्रतिक्षण जन्मती है हजारों कविताएं, मैं अपना सम्पूर्ण जीवन तुम्हारे हृदय की कविताओं के उन सूत्रों को सुलझाने में व्यय कर दूंगा। #आशु Read more

  • 2-9-4

    उम्र का एक सिरा तुम्हारे संग बंधा है, और दूसरा वक़्त की अरगनी से… तुम उस ओर थामे रहना, वक़्त को मैं सम्हाल लूंगा 🙂 कुछ बातें उन ख़तों सी होती होती हैं जिन्हें हम कभी पढ़ नहीं पाते। ना किसी के साथ और न किसी के बाद। हम रास्ते बदल लेते हैं, समझ आता… Read more

  • स्याह

    आंखों में चुभते हैं दिन के उजाले, किसी नजारे की तलाश नजर को नही। रात की स्याह का असर काफी है.. #आशु Read more

  • बेबस

    हम दोनों एक दूसरे से कभी मिले ही नहीं, दिन और रात सा है हमारा इश्क़.. उजालों सी चमक तुम, स्याह सा बेबस मैं! #आशु Read more

  • स्वभाव

    वो अवस्था कभी आती ही नहीं जब हम कह सकते है कि “अब खोने को कुछ नहीं”, प्रकृति एकदम से सबकुछ नहीं ले जाती, कुछ पीछे छोड़ ही जाती है और कुछ नहीं तो विकृतियां तो शेष रहतीं ही हैं। प्रत्येक का अपना नज़रिया अपने अनुभव होते है, कुछ लोग जीवन को सुंदर कहते है… Read more

Design a site like this with WordPress.com
प्रारंभ करें