आशुपुराण

ख़्यालों पर अब बंदिशें लगने लगी हैं।

  • पहचान

    एक नजर.. मेरे लेख पर। खुद को कैद रखना आज़ाद कर देने से ज़्यादा आसान होता है ! कभी लम्हों की कैद में ,कभी सांसों की कैद में……हमे हमेशा सलाखें ही चाहिए होती हैं ,शायद इसीलिए कि हम भी उसी में खुद को सुरक्षित महसूस करने लगते हैं और कभी इसलिए कि वो हमारी जरूरत… Read more

  • गांव की पगडंडीयों पे दौड़ते हुए सोचा करता, दूर जो ज़मीं और आसमाँ मिलते हैं वहां जाने में कितना वक़्त लगता होगा..नहीं जानता था,जरूरतों की ज़मीं और ख्वाहिशों के आसमाँ बस मिलते हुए दिखते हैं ..मिलते नहीं कभी ..! Read more

  • रात

    रात बड़ी बेरोजगार होती है , ख्वाबों -ख्वाहिशों -हकीकत संग चक्कलस करती रहती है ! Read more

  • शब्द प्रेम

    यूं मासुका का प्रेम तो मिला नहीं, तो शब्दों से पंक्तियां, और पंक्तियों से मुहब्बत चाहता हूं। #आशु Read more

  • कलम से खत लिखने का रिवाज फिर आना चाहिए.. ये चैटिंग की दुनिया बड़ा फरेब फैलाती है, #आशु Read more

Create your own website, free on WordPress.com.Create your own website.
Start free