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गांव की पगडंडीयों पे दौड़ते हुए सोचा करता, दूर जो ज़मीं और आसमाँ मिलते हैं वहां जाने में कितना वक़्त लगता होगा..नहीं जानता था,जरूरतों की ज़मीं और ख्वाहिशों के आसमाँ बस मिलते हुए दिखते हैं ..मिलते नहीं कभी ..! Read more
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यूं मासुका का प्रेम तो मिला नहीं, तो शब्दों से पंक्तियां, और पंक्तियों से मुहब्बत चाहता हूं। #आशु Read more
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कलम से खत लिखने का रिवाज फिर आना चाहिए.. ये चैटिंग की दुनिया बड़ा फरेब फैलाती है, #आशु Read more
