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बिहार के छोटे गांव एकमा से छोटे शहर खगड़िया और फिर छोटे शहर से दिल्ली महानगर तक के सफर को आसानी से देख नहीं पाता, कितना महसूस किया और क्या अनदेखा हुआ, ये समय धीरे धीरे अतीत को खंडन कर वर्तमान में घुल मिल जाना चाहता है। हम क्या पा चुके हैं और क्या खोज… Read more
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वक़्त ने बीतना होता है , बीत जाता है। हम तारीखों को ढोते हैं और समय हमारी कलाईयों पर बंधे रहने का भरम देते हुए हमें कहीं पीछे छोड़ जाता है। आगे बढ़ना भी कहाँ हो पाता है। जो पीछे छूट गया वो भला था या बुरा था जैसा भी रहा गुज़र गया……. कुछ सीखा… Read more
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बे-हद बर्बाद हैं हम..फिर भी गज़ब करते हैं, रूठते हैं, मनाते हैं फिर भी सबर करते हैं, समझ आए न आए ये सिलसिला तेरे साथ, रहते हैं तेरे दिल में और घर करते हैं। #आशु Read more
