आशुपुराण
ख़्यालों पर अब बंदिशें लगने लगी हैं।
मुझमें कुछ भी ख़ास नहीं सिवा इसके .. कि मुझे इक अजनबी शहर में.. तेरे दिल ने मेरी धड़कनों का घर बसाया है।
।। शुभोदयम् ।।
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